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Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

A National, Peer-reviewed (refereed), Bi-Monthly Journal

  ISSN: 3108-2726 (Online)
ISSN: 3108-2890 (Print)

Call For Papers - Volume 2, Issue 4 (July - August 2026)
Paper Title

‘तोड़ती पत्थर’ और ‘भिक्षुक’ में सामाजिक विषमता का चित्रण

Author(s)सोनम राय.
CountryIndia
Abstract

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता भारतीय समाज के उन वर्गों को साहित्यिक दृश्यता प्रदान करती है जो आर्थिक अभाव, सामाजिक उपेक्षा और श्रम के असमान वितरण के कारण मुख्यधारा से बाहर कर दिए गए हैं। ‘तोड़ती पत्थर’ और ‘भिक्षुक’ इस दृष्टि से उनकी सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कविताओं में हैं। पहली कविता में कठोर श्रम करती हुई स्त्री के माध्यम से वर्गीय तथा लैंगिक विषमता का चित्रण हुआ है, जबकि दूसरी कविता भूख से विघटित मनुष्य और उसके बच्चों की स्थिति को सामने लाती है। दोनों कविताएँ करुणा उत्पन्न करती हैं, किंतु उनकी करुणा भावुक दया तक सीमित नहीं रहती; वह सामाजिक व्यवस्था की संरचनात्मक अमानवीयता को उद्घाटित करती है। प्रस्तुत आलेख का केंद्रीय प्रश्न यह है कि निराला इन दोनों कविताओं में निर्धन पात्रों को निष्क्रिय दया-पात्र के रूप में चित्रित करते हैं अथवा उनमें मानवीय गरिमा, प्रतिरोध और सामाजिक प्रश्नाकुलता का भी संचार करते हैं। निराला की अन्य सामाजिक कविताओं के संदर्भ में देखने पर दोनों रचनाएँ उनकी व्यापक जनपक्षधरता, सामंती-पूँजीवादी व्यवस्था के प्रति असहमति और मनुष्य-केंद्रित काव्य-दृष्टि को प्रकट करती हैं।

Keywordsसामाजिक विषमता, श्रम, भूख, स्त्री-अस्मिता, वर्गभेद, करुणा, प्रतिरोध।
Subject AreaHindi
Issue Volume 1, Issue 3 (May - June 2025)
Published2025/05/20
How to Cite सोनम राय (2025). ‘तोड़ती पत्थर’ और ‘भिक्षुक’ में सामाजिक विषमता का चित्रण. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 1(3), 34–42.
License
Copyright © 2025 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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