| Paper Title | गढ़वाल हिमालय की लोक संस्कृति में सिद्ध एवं नाथ परम्परा |
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| Country | India |
| Abstract | उत्तराखण्ड का गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र अपनी प्राचीन सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परम्पराओं के लिए प्रसिद्ध रहा है। प्राचीन काल से ही हिमालय के इस पवित्र भू-भाग को अनेक सिद्ध ऋषि-मुनियों, ज्ञानियों एवं तपस्वियों ने योग-साधना और सिद्धि-प्राप्ति के लिए चुना। गढ़वाल की सामाजिक एवं लोक सांस्कृतिक परंपराओं में तंत्र-मंत्र और योग साधना का समृद्ध इतिहास रहा है। यहाँ की पर्वतीय संस्कृति में धर्म, मान्यताएं,लोकविश्वास और आध्यात्मिक धारणाएँ आपस में भावात्मक रूप से जुडी हुई हैं। विशेष रूप से सिद्ध-नाथपंथ की परंपरा ने गढ़वाल के धार्मिक और तांत्रिक जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया। सिद्ध-नाथ योगियों की साधना पद्धति, उनकी मंत्र साधना और लोकजीवन से जुड़े आध्यात्मिक प्रयोगों ने यहाँ के समाज में तन्त्र–मन्त्र पर आधारित योग साधना परंपरा को जन्म दिया, जिसे शाबर मंत्र परंपरा के रूप में जाना जाता है। सिद्ध-नाथपंथ की स्थापना का श्रेय गुरु मछेन्द्रनाथ और उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ को दिया जाता है। इस परंपरा का मूल उद्देश्य योग साधना और तांत्रिक ज्ञान के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति को प्राप्त करना था। नाथ सिद्धों ने अपनी योग एवं साधना पद्धति को केवल मठ-मन्दिरो तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे लोकजीवन से भी जोड़ने का प्रयास किया। परिणामस्वरूप उनके द्वारा लोक व्यवहार में प्रयुक्त अनेक शाबर तन्त्र-मंत्र स्थानीय भाषाओं और बोलियों में प्रचलित हो गए। गढ़वाल में भी सिद्ध-नाथपंथ के शाबर मंत्रों में संस्कृतनिष्ठ भाषा के साथ-साथ पाली, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं का समावेश देखने को मिलता है। |
| Keywords | गढ़वाल हिमालय, लोक-संस्कृति, सिद्ध-नाथ परम्परा, आध्यात्मिक धारणाएँ,शाबर मन्त्र,जागर गीत |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 5 (September - October 2026) |
| Published | 2026/10/21 |
| How to Cite | नवीन चंद्र भट्ट, & जयप्रकाश भट्ट (2026). गढ़वाल हिमालय की लोक संस्कृति में सिद्ध एवं नाथ परम्परा. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 136–149. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401270 |
| DOI | 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401270 |
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