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Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

A National, Peer-reviewed (refereed), Bi-Monthly Journal

  ISSN: 3108-2726 (Online)
ISSN: 3108-2890 (Print)

Call For Papers - Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Paper Title

‘हीली-बोन की बतखें’ में प्रकृति और मनुष्य का अंतर्संबंध

Author(s)
Dr. Remya L.
Department of Hindi, Sree Ayyappa College, Eramallikkara
CountryIndia
Abstract

अज्ञेय की कहानी ‘हीली-बोन की बतखें’ प्रकृति और मनुष्य के अंतर्संबंध को अत्यंत संवेदनशील और मनोवैज्ञानिक स्तर पर प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण रचना है। प्रस्तुत शोधपत्र में कहानी के माध्यम से यह विश्लेषण किया गया है कि प्रकृति केवल मानव जीवन की पृष्ठभूमि नहीं है, बल्कि उसकी भावनाओं, अनुभूतियों और अस्तित्वगत चेतना का अभिन्न अंग है। कहानी की नायिका हीली-बोन का जीवन पहाड़ी प्राकृतिक परिवेश से गहरे रूप में जुड़ा हुआ है। उसकी बतखें, बगीचा, पहाड़, जंगल और वन्य जीव उसके भावनात्मक संसार का हिस्सा हैं। लोमड़ी द्वारा बतखों का शिकार किए जाने की घटना प्रारंभ में मनुष्य और प्रकृति के बीच संघर्ष का संकेत देती है, किंतु लोमड़ी के पारिवारिक जीवन और मातृत्व का साक्षात्कार होने पर हीली की दृष्टि में परिवर्तन आता है। वह प्रकृति के प्रत्येक जीव के जीवन-संघर्ष और अस्तित्वगत अधिकार को समझने लगती है। कहानी सह-अस्तित्व, करुणा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के मूल्यों को स्थापित करती है। इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि अज्ञेय ने प्रकृति को एक जीवंत और सक्रिय सत्ता के रूप में चित्रित किया है, जो मानव चेतना को प्रभावित करती है तथा उसे व्यापक मानवीय और नैतिक दृष्टि प्रदान करती है। इस प्रकार यह कहानी प्रकृति और मनुष्य के सामंजस्यपूर्ण संबंध की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

Keywordsप्रकृति, मनुष्य, संवेदना, सह-अस्तित्व, पर्यावरण चेतना।
Subject AreaHindi
Issue Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Published2026/10/21
How to Cite Remya, L. (2026). ‘हीली-बोन की बतखें’ में प्रकृति और मनुष्य का अंतर्संबंध. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 123–128. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401265
DOI 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401265
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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