| Paper Title | भूमंडलीकरण और हिंदी: वैश्विक परिदृश्य में अवसर, चुनौतियाँ और भविष्य |
| Author(s) | |
| Country | India |
| Abstract | भूमंडलीकरण बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध की सबसे प्रभावकारी तथा चर्चित और महत्वपूर्ण घटना है। यह भूमंडलीकरण (Globalization) एक ऐसी विश्वव्यापी प्रक्रिया है जिसमें विश्व के विभिन्न देशों, अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और समाजों के बीच परस्पर आपसी अंतरनिर्भरता और एकीकरण बढ़ता है। यह विश्व को एक 'ग्लोबल विलेज' अर्थात् वैश्विक गांव की तरह आपस में परस्पर जोड़ता है, जहां वस्तुएं, सेवाएं, पूंजी, सूचना, विचार और लोग राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होते हैं। इसकी मुख्य अवधारणा 20वीं शताब्दी में विकसित पल्लवित, पुष्पित और फल्लवित हुई, विशेष रूप से विश्व-व्यापार, बाजारीकरण, उदारीकरण (ट्रेड लिबरलाइजेशन), सूचना और प्रौद्योगिकीय प्रगति और संचार माध्यमों के विकास से। भारत में यह 1991 की आर्थिक सुधार नीतियों जैसे उदारीकरण, बाजारीकरण तथा निजीकरण और वैश्वीकरण) से प्रमुखता से जुड़ा, जब विदेशी पूंजी निवेश और विश्व-व्यापार को बढ़ावा दिया गया। सरल शब्दों में, भूमंडलीकरण का अर्थ है विश्व को एकत्र कर छोटा और परस्पर सम्बद्ध रूप में जुड़ा हुआ बनाना, जहां एक देश की घटना और समस्या दूसरे देशों को प्रभावित करती है। |
| Keywords | भूमंडलीकरण,बाजारवाद,उदारीकरण,प्रौद्योगिकी,निजीकरण |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 5 (September - October 2026) |
| Published | 2026/10/21 |
| How to Cite | Das, D. (2026). भूमंडलीकरण और हिंदी: वैश्विक परिदृश्य में अवसर, चुनौतियाँ और भविष्य. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 118–122. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401262 |
| DOI | 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401262 |
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