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Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

A National, Peer-reviewed (refereed), Bi-Monthly Journal

  ISSN: 3108-2726 (Online)
ISSN: 3108-2890 (Print)

Call For Papers - Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Paper Title

वेदान्त की वैश्विकता

Author(s)
प्रीति
शोधच्छात्रा, संस्कृत विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, (के.वि.वि), नई दिल्ली 110025, भारत
डॉ. धनञ्जय मणि त्रिपाठी
सह आचार्य, संस्कृत विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, (के.वि.वि), नई दिल्ली 110025, भारत
CountryIndia
Abstract

वेदान्त दर्शन भारतीय दर्शनों में ही नहीं अपितु समस्त विश्व दर्शनों में शिरोमणि है। शङ्कराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैतवाद नामक सिद्धान्त समस्त जगत् को ब्रह्म का विवर्त मात्र कहता है। तथा इसके अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र परमार्थ वस्तु है, अन्य सभी जड़ समूह अवस्तु है। अतः इन्हीं उत्कृष्ट अवधारणाओं से प्रभावित होकर देश एवं विदेश में वेदान्त का प्रचार प्रसार हुआ तथा अनेकों विदेशी विद्वानों ने वेदान्त दर्शन से प्रभावित होकर अपने ग्रन्थों को प्रकाशित किया। प्रस्तुत लेख में वेदान्त का स्वरूप, अवधारणाएं एवं वेदान्त से प्रभावित पाश्चात्यों के ग्रन्थ एवं वेदान्त दर्शन के ग्रन्थों का अनुवाद एवं वेदान्त की वैश्विकता का उल्लेख किया जाएगा।

Keywordsवेदान्त, पाश्चात्य विद्वान्, अद्वैत, पॉल ड्यूसन, शोपेनहावर, इशरवुड, जर्मन, उपनिषद्
Subject AreaPhilosophy
Issue Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Published2026/10/06
How to Cite प्रीति, & धनञ्जय मणि त्रिपाठी (2026). वेदान्त की वैश्विकता. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 43–48. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401247
DOI 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401247
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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