| Paper Title | प्रेमचंद का नारीवाद: त्याग, आदर्श और मर्यादा का शिकंजा |
| Author(s) | Anuradha. |
| Country | India |
| Abstract | सारांश - “ प्रस्तुत आलेख में प्रेमचंद साहित्य में मौजूद नारीवादी दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन पेश किया गया है, प्रेमचंद जिन्होंने स्त्री सम्बन्धी समस्याओं को अपनी रचनाओं में स्थान दिया और जिन्हें प्रगतिशील साहित्यकार के रूप में जाना जाता है, किंतु इस लेख में प्रेमचंद की ‘सेवासदन’, ‘बड़े घर की बेटी’, ‘गोदान’, ‘निर्मला’ जैसी मूल रचनाओं के आलोचनात्मक पुनर्पाठ के माध्यम से उनकी प्रगतिशीलता पर प्रश्न चिन्ह लगाया गया है और यह सिद्ध करने का प्रयास किया गया है कि प्रेमचंद का नारीवाद नारी को स्वतंत्रता देने के बजाय उसे ‘त्याग’, ‘आदर्श’, और ‘मर्यादा’ के शिकंजे में जकड़ देता है। इस आलेख में इतिहासकार ‘चारू गुप्ता’ के शोध पत्र “पोर्टेयल ऑफ विमेन इन प्रेमचंद्स स्टोरीज: ए क्रिटिक” और दलित चिंतक ‘डॉ. धर्मवीर’ की रचना “सामंत का मुंशी” से प्रेमचंद को लेकर इनकी स्थापना को तार्किक रूप से पेश किया गया है इस आलेख में दिखाया गया है कि कैसे प्रेमचंद के लिए ‘स्त्री का देवत्वकरण’ वास्तविकता में पितृसत्तात्मक अनुकूलन का छद्म है। अंत में यह आलेख इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि प्रेमचंद ने स्त्री को सामाजिक बेड़ियों से मुक्त नहीं किया बल्कि उस पर आदर्शवाद का मुल्लमा चढ़ा दिया जो कि स्त्री की स्वतंत्रता को और बाधित करता है।” |
| Keywords | कूट शब्द – ‘पितृसत्तात्मक ढांचा’, ‘मर्यादा की बेड़ियाँ’, ‘प्रायश्चित का ज़ाल’, ‘स्त्री का देवत्वकरण’, ‘ सहनशीलता का महिमामंडल’, ‘मूक आत्मसमर्पण’, ‘त्याग’, ‘आदर्शों का शिकंजा’। |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (July - August 2026) |
| Published | 2026/08/31 |
| How to Cite | Anuradha (2026). प्रेमचंद का नारीवाद: त्याग, आदर्श और मर्यादा का शिकंजा. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(4), 106–112. |
| License |
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