| Paper Title | फास्ट फूड संस्कृति का भारतीय युवाओं की जीवनशैली पर प्रभाव |
| Author(s) | सुमन तिवारी. |
| Country | India |
| Abstract | वर्तमान समय में वैश्वीकरण, शहरीकरण तथा तकनीकी विकास के कारण भारतीय समाज में फास्ट फूड संस्कृति का तेजी से विस्तार हुआ है। विशेष रूप से युवा वर्ग इस संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित हो रहा है। फास्ट फूड केवल भोजन की एक शैली नहीं रह गया है, बल्कि यह आधुनिक जीवनशैली, सामाजिक प्रतिष्ठा और उपभोगवादी प्रवृत्ति का प्रतीक बन चुका है। इस शोध पत्र का उद्देश्य भारतीय युवाओं की जीवनशैली पर फास्ट फूड संस्कृति के सामाजिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य संबंधी तथा आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण करना है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन युवाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा पाचन संबंधी समस्याएँ युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अतिरिक्त, फास्ट फूड संस्कृति युवाओं की दैनिक दिनचर्या, नींद, मानसिक स्वास्थ्य तथा शारीरिक सक्रियता को भी प्रभावित कर रही है। सोशल मीडिया, विज्ञापन, ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाएँ तथा पश्चिमी संस्कृति का आकर्षण युवाओं में फास्ट फूड की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह शोध यह भी दर्शाता है कि फास्ट फूड संस्कृति के कारण पारंपरिक भारतीय भोजन प्रणाली और पारिवारिक भोजन की परंपराएँ कमजोर हो रही हैं। युवाओं में घर के भोजन की अपेक्षा बाहर के भोजन की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन भी देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, फास्ट फूड उद्योग ने रोजगार के नए अवसर उत्पन्न किए हैं और आधुनिक जीवन की व्यस्तता में सुविधा प्रदान की है, फिर भी इसके नकारात्मक प्रभाव अधिक गंभीर दिखाई देते हैं। अध्ययन के अंत में यह सुझाव दिया गया है कि युवाओं में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम तथा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। विद्यालयों, महाविद्यालयों, परिवारों तथा सरकार को मिलकर स्वस्थ भोजन संबंधी शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने चाहिए ताकि युवा वर्ग स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपना सके। |
| Subject Area | Sociology |
| Issue | Volume 1, Issue 2 (March - April 2025) |
| Published | 2025/03/10 |
| How to Cite | सुमन तिवारी (2025). फास्ट फूड संस्कृति का भारतीय युवाओं की जीवनशैली पर प्रभाव. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 1(2), 14–20. |
| License |
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