| Paper Title | अलवर अंचल का मंदिर स्थापत्य: प्रतिहार युगीन कला से हवेली वास्तुकला एवं देवस्थान प्रशासनिक प्रबंधन का एक समालोचनात्मक अध्ययन |
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| Country | India |
| Abstract | प्रस्तुत शोध-पत्र राजस्थान के उत्तर-पूर्वी अंचल में मंदिर वास्तुकला के 10वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी तक के ऐतिहासिक, कलात्मक एवं प्रशासनिक विकास क्रम का समालोचनात्मक अनुशीलन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का प्राथमिक ध्येय 10वीं शताब्दी के गुर्जर-प्रतिहार (बड़गूजर) युगीन 'महा-मारु' शैली के उत्कृष्ट स्थापत्य स्मारकों—राजोरगढ़ (पारानगर) के नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर (मथनदेव कालीन, 959–960 ई.) तथा नौगजा दिगंबर जैन मंदिर (922–923 ई.)—से लेकर भानगढ़ के मध्यकालीन स्थापत्य एवं 18वीं-20वीं शताब्दी की अलवर रियासतकालीन 'सामरिक-हवेली वास्तुकला' का गहन विश्लेषणात्मक मूल्यांकन करना है। इसके अतिरिक्त, यह शोध-पत्र अलवर के मंदिर स्थापत्य के भौतिक एवं तकनीकी पक्षों—जैसे 'सागर' जलाशय का जल-स्थापत्य संयोजन, महल चौक (जलेबी चौक) का राजसी स्थापत्य, अरावली के पत्थरों की बिना गारे की इंटर-लॉकिंग प्रविधि, गर्भगृहों का 'आरायश' शिल्प, तथा बाला किला एवं नगर-द्वारों के 'प्रहरी देवालय' स्वरूप—का पुरातात्विक साक्ष्यों के आलोक में परीक्षण करता है। शोध का द्वितीय महत्वपूर्ण आयाम स्वतंत्रता-उत्तर राजस्थान में इन सांस्कृतिक धरोहरों के विधिक व प्रशासनिक प्रबंधन का प्रामाणिक अध्ययन है, जिसके अंतर्गत देवस्थान विभाग (सहायक आयुक्त कार्यालय, अलवर) के अधीन पंजीकृत कुल 665 संस्थानों (0 प्रत्यक्ष प्रभार, 8 आत्मनिर्भर, 35 सुपुर्दगी तथा 622 सहायता प्राप्त/एन्यूटी) का श्रेणीवार प्रामाणीकृत डेटा प्रस्तुत किया गया है। यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि अलवर के देवालय केवल अतीत की कलात्मक धरोहर नहीं हैं, बल्कि निरंतर पूजा-अर्चना एवं राजकीय-प्रशासनिक संरक्षण से संचालित 'जीवंत मंदिर' (Living Temples) परंपरा के अप्रतिम साक्ष्य हैं। |
| Keywords | अलवर मंदिर स्थापत्य, गुर्जर-प्रतिहार कला, महा-मारु शैली, नीलकंठेश्वर राजोरगढ़, सामरिक-हवेली वास्तुकला, सागर जल-स्थापत्य, देवस्थान विभाग अलवर, राजकीय सहायता प्राप्त मंदिर (Annuity), जीवंत मंदिर परंपरा। |
| Subject Area | History |
| Issue | Volume 2, Issue 5 (September - October 2026) |
| Published | 2026/10/21 |
| How to Cite | आशा कुमारी मीणा, & शरद राठौड़ (2026). अलवर अंचल का मंदिर स्थापत्य: प्रतिहार युगीन कला से हवेली वास्तुकला एवं देवस्थान प्रशासनिक प्रबंधन का एक समालोचनात्मक अध्ययन. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 159–166. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401273 |
| DOI | 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401273 |
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