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Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal

A National, Peer-reviewed (refereed), Bi-Monthly Journal

  ISSN: 3108-2726 (Online)
ISSN: 3108-2890 (Print)

Call For Papers - Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Paper Title

अलवर अंचल का मंदिर स्थापत्य: प्रतिहार युगीन कला से हवेली वास्तुकला एवं देवस्थान प्रशासनिक प्रबंधन का एक समालोचनात्मक अध्ययन

Author(s)
आशा कुमारी मीणा
इतिहास एवं भारतीय संस्कृति विभाग आई.आई.एस. विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
प्रो. शरद राठौड़
इतिहास विभाग आई.आई.एस. विश्वविद्यालय, जयपुर, राजस्थान
CountryIndia
Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र राजस्थान के उत्तर-पूर्वी अंचल में मंदिर वास्तुकला के 10वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी तक के ऐतिहासिक, कलात्मक एवं प्रशासनिक विकास क्रम का समालोचनात्मक अनुशीलन प्रस्तुत करता है। अध्ययन का प्राथमिक ध्येय 10वीं शताब्दी के गुर्जर-प्रतिहार (बड़गूजर) युगीन 'महा-मारु' शैली के उत्कृष्ट स्थापत्य स्मारकों—राजोरगढ़ (पारानगर) के नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर (मथनदेव कालीन, 959–960 ई.) तथा नौगजा दिगंबर जैन मंदिर (922–923 ई.)—से लेकर भानगढ़ के मध्यकालीन स्थापत्य एवं 18वीं-20वीं शताब्दी की अलवर रियासतकालीन 'सामरिक-हवेली वास्तुकला' का गहन विश्लेषणात्मक मूल्यांकन करना है। इसके अतिरिक्त, यह शोध-पत्र अलवर के मंदिर स्थापत्य के भौतिक एवं तकनीकी पक्षों—जैसे 'सागर' जलाशय का जल-स्थापत्य संयोजन, महल चौक (जलेबी चौक) का राजसी स्थापत्य, अरावली के पत्थरों की बिना गारे की इंटर-लॉकिंग प्रविधि, गर्भगृहों का 'आरायश' शिल्प, तथा बाला किला एवं नगर-द्वारों के 'प्रहरी देवालय' स्वरूप—का पुरातात्विक साक्ष्यों के आलोक में परीक्षण करता है। शोध का द्वितीय महत्वपूर्ण आयाम स्वतंत्रता-उत्तर राजस्थान में इन सांस्कृतिक धरोहरों के विधिक व प्रशासनिक प्रबंधन का प्रामाणिक अध्ययन है, जिसके अंतर्गत देवस्थान विभाग (सहायक आयुक्त कार्यालय, अलवर) के अधीन पंजीकृत कुल 665 संस्थानों (0 प्रत्यक्ष प्रभार, 8 आत्मनिर्भर, 35 सुपुर्दगी तथा 622 सहायता प्राप्त/एन्यूटी) का श्रेणीवार प्रामाणीकृत डेटा प्रस्तुत किया गया है। यह अध्ययन प्रतिपादित करता है कि अलवर के देवालय केवल अतीत की कलात्मक धरोहर नहीं हैं, बल्कि निरंतर पूजा-अर्चना एवं राजकीय-प्रशासनिक संरक्षण से संचालित 'जीवंत मंदिर' (Living Temples) परंपरा के अप्रतिम साक्ष्य हैं।

Keywordsअलवर मंदिर स्थापत्य, गुर्जर-प्रतिहार कला, महा-मारु शैली, नीलकंठेश्वर राजोरगढ़, सामरिक-हवेली वास्तुकला, सागर जल-स्थापत्य, देवस्थान विभाग अलवर, राजकीय सहायता प्राप्त मंदिर (Annuity), जीवंत मंदिर परंपरा।
Subject AreaHistory
Issue Volume 2, Issue 5 (September - October 2026)
Published2026/10/21
How to Cite आशा कुमारी मीणा, & शरद राठौड़ (2026). अलवर अंचल का मंदिर स्थापत्य: प्रतिहार युगीन कला से हवेली वास्तुकला एवं देवस्थान प्रशासनिक प्रबंधन का एक समालोचनात्मक अध्ययन. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 159–166. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401273
DOI 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401273
License
Copyright © 2026 The Author(s). This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License (CC BY 4.0).

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