| Paper Title | वेदान्त की वैश्विकता |
| Author(s) | |
| Country | India |
| Abstract | वेदान्त दर्शन भारतीय दर्शनों में ही नहीं अपितु समस्त विश्व दर्शनों में शिरोमणि है। शङ्कराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैतवाद नामक सिद्धान्त समस्त जगत् को ब्रह्म का विवर्त मात्र कहता है। तथा इसके अनुसार ब्रह्म ही एकमात्र परमार्थ वस्तु है, अन्य सभी जड़ समूह अवस्तु है। अतः इन्हीं उत्कृष्ट अवधारणाओं से प्रभावित होकर देश एवं विदेश में वेदान्त का प्रचार प्रसार हुआ तथा अनेकों विदेशी विद्वानों ने वेदान्त दर्शन से प्रभावित होकर अपने ग्रन्थों को प्रकाशित किया। प्रस्तुत लेख में वेदान्त का स्वरूप, अवधारणाएं एवं वेदान्त से प्रभावित पाश्चात्यों के ग्रन्थ एवं वेदान्त दर्शन के ग्रन्थों का अनुवाद एवं वेदान्त की वैश्विकता का उल्लेख किया जाएगा। |
| Keywords | वेदान्त, पाश्चात्य विद्वान्, अद्वैत, पॉल ड्यूसन, शोपेनहावर, इशरवुड, जर्मन, उपनिषद् |
| Subject Area | Philosophy |
| Issue | Volume 2, Issue 5 (September - October 2026) |
| Published | 2026/10/06 |
| How to Cite | प्रीति, & धनञ्जय मणि त्रिपाठी (2026). वेदान्त की वैश्विकता. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 43–48. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401247 |
| DOI | 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401247 |
| License |
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