| Paper Title | उच्च गंगा बेसिन में पर्यटन वहन क्षमता और भू-पारिस्थितिकीय लचीलापन का आँकलन: देवप्रयाग का एक भौगोलिक अध्ययन |
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| Country | India |
| Abstract | गढ़वाल हिमालय के अंतर्गत उच्च गंगा बेसिन में अनियंत्रित तीर्थाटन और मौसमी पर्यटन प्रवाह ने संवेदनशील नदी तटीय भू-आकृतियों और पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर दबाव उत्पन्न किया है। प्रस्तुत शोध पत्र भागीरथी और अलकनंदा के पावन संगम स्थल देवप्रयाग की पर्यटन वहन क्षमता और भू-पारिस्थितिकीय लचीलेपन का मात्रात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। अध्ययन में सिफुएंतेस मॉडल के आधार पर भौतिक वहन क्षमता, वास्तविक वहन क्षमता तथा प्रभावी वहन क्षमता का परिकलन किया गया है। इसके साथ ही विश्लेषणात्मक पदानुक्रम प्रक्रिया और बहु-मानदंडीय निर्णय विश्लेषण का उपयोग करते हुए ढाल प्रवणता, शैल संधियों की भंगुरता, अतिभूकंपीय संवेदनशीलता, जलवैज्ञानिक उतार-चढ़ाव और अपशिष्ट प्रबंधन सूचकांकों के आधार पर भू-पारिस्थितिकीय लचीलापन सूचकांक तैयार किया गया। तीर्थयात्रा काल-मई–जून के प्राथमिक सर्वेक्षण आंकड़े दर्शाते हैं कि दैनिक पर्यटकों का आगमन सुरक्षित प्रभावी वहन क्षमता (6,080 व्यक्ति/दिन) की तुलना में लगभग 184प्रतिशत अधिक है। संगम क्षेत्र का भू-पारिस्थितिकीय लचीलापन स्तर अत्यंत न्यून (0.28 से 0.38) पाया गया, जो तीव्र ढालों पर अत्यधिक मानव भार, ठोस अपशिष्ट और अनियोजित निर्माण कार्यों के कारण भूस्खलन और नदी-तटीय अपरदन के जोखिम को बढ़ाता है। यह अध्ययन हिमालयी संगम नगरों के सतत प्रबंधन हेतु स्थानिक विकेंद्रीकरण, ढाल-आधारित संभाग और गतिशील आगंतुक नियंत्रण प्रणाली की संस्तुति करता है। |
| Keywords | पर्यटन वहन क्षमता, भू-पारिस्थितिकीय लचीलापन, देवप्रयाग, उच्च गंगा बेसिन, ढाल अस्थिरता, सतत पर्वतीय पर्यटन। |
| Subject Area | Geography |
| Issue | Volume 2, Issue 5 (September - October 2026) |
| Published | 2026/09/25 |
| How to Cite | श्रवण कुमार शुक्ल, & भूपेश कुमार मिश्र (2026). उच्च गंगा बेसिन में पर्यटन वहन क्षमता और भू-पारिस्थितिकीय लचीलापन का आँकलन: देवप्रयाग का एक भौगोलिक अध्ययन. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(5), 10–18. https://doi.org/10.68504/spmj.2026.v2.i5.401239 |
| DOI | 10.68504/SPMJ.2026.v2.i5.401239 |
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