| Paper Title | डॉ. रांगेय राघव के जीवनीपरक उपन्यास ‘धूनी का धुआँ’ में इतिहास, मानवतावाद और सांस्कृतिक पुनर्जागरण |
| Author(s) | Dr. Surendra Kumar. |
| Country | India |
| Abstract | डॉ. रांगेय राघव का जीवनीपरक उपन्यास ‘धूनी का धुआँ’ हिन्दी साहित्य में ऐतिहासिक चेतना, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मानवतावादी दृष्टि का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। यह उपन्यास नाथ सम्प्रदाय के महान योगी गोरखनाथ के जीवन के माध्यम से मध्यकालीन भारतीय समाज की राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक परिस्थितियों का व्यापक चित्र प्रस्तुत करता है। उपन्यासकार ने इतिहास, लोकश्रुतियों तथा अपने गहन शोध-अनुभव के आधार पर गोरखनाथ को केवल एक योगी या सिद्धपुरुष के रूप में नहीं, बल्कि युग-सुधारक, समाज-संशोधक और मानवतावादी चिन्तक के रूप में चित्रित किया है। इस लेख में ‘धूनी का धुआँ’ के कथानक, इतिहास-दृष्टि, गोरखनाथ के व्यक्तित्व, उनके योग-दर्शन, नारी-दृष्टि, सामाजिक समरसता तथा रांगेय राघव की औपन्यासिक कला का समालोचनात्मक अध्ययन किया गया है। साथ ही यह प्रतिपादित किया गया है कि यह कृति केवल अतीत का पुनर्निर्माण नहीं करती, बल्कि वर्तमान समाज के लिए भी मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना का संदेश देती है। |
| Keywords | रांगेय राघव, धूनी का धुआँ, गोरखनाथ, नाथ सम्प्रदाय, जीवनीपरक उपन्यास, मानवतावाद, इतिहास-दृष्टि, योग-दर्शन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण। |
| Subject Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (July - August 2026) |
| Published | 2026/08/31 |
| How to Cite | Kumar, S. (2026). डॉ. रांगेय राघव के जीवनीपरक उपन्यास ‘धूनी का धुआँ’ में इतिहास, मानवतावाद और सांस्कृतिक पुनर्जागरण. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(4), 171–176. |
| License |
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