| Paper Title | स्वतंत्रता के बाद भारत में खादी उद्योग के संरक्षण एवं विकास की नीतियाँ (1947-2000) |
| Author(s) | Zeba Mumtaz. |
| Country | India |
| Abstract | स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत सरकार ने खादी उद्योग को ग्रामीण रोजगार, आत्मनिर्भरता तथा कुटीर उद्योगों के विकास के प्रमुख साधन के रूप में अपनाया। महात्मा गांधी के स्वदेशी एवं ग्राम स्वराज के विचारों से प्रेरित होकर खादी को राष्ट्रीय विकास नीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। प्रस्तुत शोध-पत्र में स्वतंत्रता के बाद खादी उद्योग के संरक्षण एवं विकास के लिए अपनाई गई सरकारी नीतियों का ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है। इसमें पंचवर्षीय योजनाओं, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की स्थापना, वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, विपणन, तकनीकी उन्नयन तथा संस्थागत सुधारों की भूमिका का विवेचन किया गया है। साथ ही, 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद खादी उद्योग के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों तथा सरकारी नीतियों में आए परिवर्तनों का भी अध्ययन किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि सरकारी संरक्षण के कारण खादी उद्योग ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, पारंपरिक कौशल के संरक्षण तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, यद्यपि बाजार प्रतिस्पर्धा, वित्तीय सीमाओं तथा तकनीकी चुनौतियों के कारण इसकी विकास गति प्रभावित हुई। यह अध्ययन खादी उद्योग की नीतिगत यात्रा तथा ग्रामीण विकास में उसकी भूमिका को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने का प्रयास करता है। |
| Keywords | खादी उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, पंचवर्षीय योजनाएँ, सरकारी नीतियाँ, उदारीकरण। |
| Subject Area | History |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (July - August 2026) |
| Published | 2026/08/31 |
| How to Cite | Mumtaz, Z. (2026). स्वतंत्रता के बाद भारत में खादी उद्योग के संरक्षण एवं विकास की नीतियाँ (1947-2000). Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(4), 138–145. |
| License |
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