| Paper Title | 1857 के विद्रोह में चंद्रपुर के बाबूराव शेडमाके का योगदान: ऐतिहासिक विश्लेषण |
| Author(s) | Pratibha Gond. |
| Country | India |
| Abstract | 1857 का विद्रोह सिर्फ संगठित राष्ट्रवादी आंदोलनों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रों में औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध हुए स्थानीय एवं आदिवासी प्रतिरोधों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। मध्य भारत के गोंड बहुल क्षेत्र में बाबूराव पुल्लेसूर शेडमाके का विद्रोह इसी प्रकार के प्रतिरोध का महत्वपूर्ण उदाहरण है। बाबूराव शेडमाके 19वीं शताब्दी के मध्य में चांदा क्षेत्र के एक गोंड नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे। 1857 के व्यापक विद्रोह की पृष्ठभूमि में बाबूराव शेडमाके ने स्थानीय गोंड शक्ति को संगठित कर ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी। इस शोध-पत्र में बाबूराव शेडमाके के जीवन, उनके सामाजिक-राजनीतिक परिवेश, ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष के कारणों, उनके नेतृत्व में हुए सैन्य प्रतिरोध, स्थानीय सहयोग, गुरिल्ला युद्ध-पद्धति तथा ब्रिटिश दमन का ऐतिहासिक विश्लेषण प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों के आधार पर किया गया है। विशेष रूप से 1857-1858 में नंदगांव घोसरी, सगनापुर, बामनपेठ तथा घोट क्षेत्र में हुए संघर्षों को औपनिवेशिक सत्ता और स्थानीय आदिवासी शक्ति के बीच संघर्ष के रूप में देखा गया है। जिससे यह प्रमाणित होता है कि बाबूराव शेडमाके का संघर्ष केवल एक स्थानीय विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह औपनिवेशिक सत्ता द्वारा स्थानीय राजनीतिक अधिकारों, संसाधनों और सामाजिक संरचनाओं में किए जा रहे हस्तक्षेप के विरुद्ध गोंड समाज की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी। |
| Keywords | बाबूराव शेडमाके, गोंड, चांदा, 1857 का विद्रोह, आदिवासी प्रतिरोध, औपनिवेशिक शासन, गोंडवाना। |
| Subject Area | History |
| Issue | Volume 2, Issue 4 (July - August 2026) |
| Published | 2026/08/31 |
| How to Cite | Gond, P. (2026). 1857 के विद्रोह में चंद्रपुर के बाबूराव शेडमाके का योगदान: ऐतिहासिक विश्लेषण. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(4), 130–137. |
| License |
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