| Article Title |
लोक-परंपरा में ग्राम देवी : मिथकीय आख्यानों और सामाजिक स्मृति का ऐतिहासिक अध्ययन |
| Author(s) | डॉ. रितेश्वर नाथ तिवारी. |
| Country | India |
| Abstract |
ग्राम देवी केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृति, सामुदायिक नैतिकता और ऐतिहासिक अनुभव की संरचनात्मक अभिव्यक्ति हैं। मिथकीय आख्यानों में निहित महामारी, अकाल, बाढ़ तथा सामाजिक संकटों की स्मृतियाँ ग्रामीण समाज द्वारा सांस्कृतिक रूप में संरक्षित की जाती हैं। लेख में स्मृति-विमर्श, नृवंशात्मक दृष्टि और समाजशास्त्रीय विश्लेषण के आधार पर यह प्रतिपादित किया गया है कि ग्राम देवी के अनुष्ठान सामूहिक पहचान और सामाजिक पुनर्संरचना के साधन हैं। बिहार के क्षेत्रीय उदाहरणों के साथ दक्षिण और पश्चिम भारत की ग्रामदेवी परंपराओं का तुलनात्मक विश्लेषण यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद संरचनात्मक तत्वों संकट की सांस्कृतिक व्याख्या, पवित्र भूगोल का निर्माण और अनुष्ठानिक सहभागिता में व्यापक समानता विद्यमान है। उपनिवेशकालीन लेखन और आधुनिकता के प्रभावों की समीक्षा से स्पष्ट होता है कि ग्राम देवी की परंपरा समय के साथ रूपांतरित अवश्य हुई है, किंतु उसकी मूल सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना जीवित बनी हुई है। ग्राम देवी की अवधारणा भारतीय इतिहास की उस जीवित धारा को उद्घाटित करती है, जो अभिलेखीय स्रोतों से परे लोकस्मृति और सांस्कृतिक व्यवहारों में संरक्षित रहती है। |
| Area | History |
| Issue | Volume 2, Issue 1 (January - February 2026) |
| Published | 2026/02/16 |
| How to Cite | रितेश्वर नाथ तिवारी (2026). लोक-परंपरा में ग्राम देवी : मिथकीय आख्यानों और सामाजिक स्मृति का ऐतिहासिक अध्ययन. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(1), 34–43. |
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