| Article Title |
संत मलूकदास के काव्य में मानवीय संवेदना |
| Author(s) | डॉ. मुन्ना साह. |
| Country | India |
| Abstract |
मनुष्य जिन आंतरिक भावनाओं एवं अनुभूतियों के मध्यम से दूसरे के सुख-दुःख, पीड़ा, करुणा तथा आनंद को अनुभव करता है, उसे संवेदना कहते हैं। करुणा, सहानुभूति, प्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व आदि संवेदना के आवश्यक तत्व हैं। निर्गुण भक्ति परंपरा के संत कवियों में संत मलूकदास का प्रमुख स्थान है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, करुणा, दया, समता, सांसारिक मोह से विरक्ति और लोकमंगल की भावना का स्वर स्पष्टता के साथ अभिव्यक्त हुआ है। उन्होंने माया को मानव उन्नति में बाधक एवं पतन का मूल कारण माना है तथा आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। वे मानते हैं कि माया के बंधन से मुक्त होने के लिए गुरु की शरण में जाना आश्यक है। मलूकदास ने नैतिकता, प्रेम और सदाचार को मानवता के लिए अनिवार्य बताया है तथा उनकी वाणी में समस्त मानव-कल्याण की भावना निहित है। |
| Area | Hindi |
| Issue | Volume 2, Issue 1 (January - February 2026) |
| Published | 2026/02/09 |
| How to Cite | मुन्ना साह (2026). संत मलूकदास के काव्य में मानवीय संवेदना. Shodh Prabha: A Multidisciplinary Journal, 2(1), 22–26. |
View / Download PDF File